समाजवाद क्या है? | What Is Socialism In Hindi

समाजवाद क्या है? – नमस्कार दोस्तों कैसे है आप सभी? मैं आशा करता हु की आप सभी अच्छे ही होंगे. दोस्तों आज हम समाजवाद (Socialism) के बारे में विस्तार से जानेंगे.

आज के इस आर्टिकल में हम समाजवाद क्या है (Samajwad Kya Hai), Samajwad In Hindi, समाजवाद का जनक कौन था, समाजवाद की विशेषताएं, समाजवाद एवं साम्यवाद में क्या अंतर है, आदि के साथ समाजवाद (Socialism) के बारे में और भी बहुत सारी बातो के बारे में जानेंगे.

तो चलिए शुरू करते है…

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समाजवाद क्या है? | What Is Socialism In Hindi

समाजवाद क्या है? | What Is Socialism In Hindi
समाजवाद क्या है? | What Is Socialism In Hindi

Samajwad Kya Hai – समाजवाद एक ऐसी विचारधारा/ सिद्धांत/ व्यवस्था है जो समतामूलक समाज व राज्य की स्थापना पर बल देती है। समाजवाद का मुख्य ध्येय समाज की आर्थिक समानता है। यह व्यवस्था पूंजीवाद का विरोध करती है तथा आर्थिक समानता का समर्थन करती है। इस विचारधारा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को समानता का अधिकार है तथा किसी भी व्यक्ति के साथ आर्थिक भेदभाव नहीं किया जाएगा।

कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था/ बुर्जुआ विचारधारा को आर्थिक असमानता का सबसे बड़ा कारण माना है। उनके अनुसार पूंजीवादी वर्ग हमेशा से ही श्रमिक वर्ग का शोषण करता आया है। कार्ल मार्क्स ने अपनी रचना दास कैपिटल में पूंजीवादियों व श्रमिक वर्ग में संघर्ष के कारणों का उल्लेख किया है तथा ऐसी कल्पना की है कि एक दिन ऐसा आएगा जब पूंजीवाद का अंत होगा तथा सम्पूर्ण विश्व पर श्रमिक वर्ग (सर्वहारा वर्ग) का शासन स्थापित हो जाएगा।

हालांकि समाजवादी विचारधारा प्रत्येक युग में विद्यमान रही है । ऐसे कई उदाहरण हैं जिनसे यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य में वर्गीय भेदभाव, सामाजिक, आर्थिक असमानता हमेशा से ही बनी रही है । परम्परावादी अर्थशास्त्रीयों द्वारा निर्मित समाजवादी सिद्धान्तों व नीतियों के विरुद्ध 18वीं शताब्दी में इसके स्वरूप में परिवर्तन आना शुरू हो गया।

18 वीं सदी के उत्तरार्ध में समानता पर आधारित फ़्रांस की क्रांति ने लोगों की परंपरावादी सोच को बदल दिया, उनमें एक नई चेतना का प्रसार हुआ। इसके पश्चात् 18वीं व 19वीं शताब्दि की औद्योगिक क्रांति में नए-नए उद्योगों व कारखानों की स्थापना से पूंजीवाद का बहुत अधिक बोलबाला हो गया। पूंजीपतियों द्वारा श्रमिकों का शोषण किया जाने लगा। उनसे अत्यधिक काम लिए जाने के बावजूद भी उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया जाता था।

धीरे-धीरे असमानता व शोषण की इस नीति के कारण मजदूर, कर्मचारी व छोटे व्यापारी वर्गों में पूंजीपतियों के विरुद्ध असंतोष बढ़ने लगा। इन्ही कुछ कारणों की वजह से समाजवाद का उदय हुआ जिसमें समाज के सभी लोगों को आर्थिक समानता प्रदान की गयी है। धीरे-धीरे समाजवाद की जड़ें पूरे यूरोप में फैलने लगी। 1917 में रूसी क्रांति की सफलता के फलस्वरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाजवाद की प्रतिष्ठा ओर अधिक बढ़ गई।

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समाजवाद की विशेषताएं | Features of Socialism

समाजवाद की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. राज्य का हस्तक्षेप

राज्य आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के प्रदर्शन में स्थायी और कुशलता से हस्तक्षेप करता है और श्रमिकों की कीमतों और मजदूरी को नियंत्रित करता है।

सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और उत्पादन के साधन सुनिश्चित करने के लिए राज्य का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।

2. संतुलित आय वितरण

आय वितरण का अर्थ है कि समाज द्वारा उत्पादित हर चीज को सभी लोगों के बीच समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए। उत्पादन का लाभ राज्य द्वारा नियंत्रित किया जाता है और श्रमिकों के बीच विभाजित किया जाता है।

राज्य नियंत्रित आय वितरण का मुख्य उद्देश्य सामाजिक वर्गों के बीच आर्थिक शक्ति के महान अंतर के कारण मौजूद असमानताओं को समाप्त करना है।

3. उत्पादन के साधनों का समाजीकरण

भूमि, कंपनियों और मशीनों की संपूर्ण उत्पादक संरचना सामूहिक संपत्ति, सहकारी समितियां या सार्वजनिक उद्यम हैं। यह संरचना राज्य द्वारा प्रशासित है, साथ ही साथ वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन की पूरी प्रक्रिया है।

सभी धन और मूल्य जो सामाजिक उत्पादन से उत्पन्न होते हैं, उन्हें समान रूप से नागरिकों के बीच विभाजित किया जाना चाहिए या समाज के लाभ के लिए निवेश किया जाना चाहिए। इस प्रकार, समाजवाद में कोई निजी संपत्ति नहीं है।

4. वर्ग प्रणाली का अस्तित्व

उत्पादन के साधनों के परिणामस्वरूप, सभी समाजवाद में, केवल सर्वहारा वर्ग (श्रमिकों) के सामाजिक वर्ग का अस्तित्व होना चाहिए।

कोई अमीर या गरीब नहीं है, कोई मालिक और कर्मचारी नहीं है और अर्थव्यवस्था के संसाधन सभी के हैं। विरोधी हितों के साथ कोई सामाजिक वर्ग नहीं हैं या जो सामाजिक असमानता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

5. नियोजित अर्थव्यवस्था

इसका अर्थ है कि देश की अर्थव्यवस्था और उत्पादन राज्य द्वारा नियंत्रित किया जाता है ताकि यथासंभव समतावादी कार्य किया जा सके। राज्य अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है, जैसे कि उत्पादन, मूल्य और बिक्री को नियंत्रित करना।

मजदूरी के मूल्य और भुगतान को नियंत्रित करना भी राज्य की जिम्मेदारी है। नियोजित अर्थव्यवस्था को अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीयकरण भी कहा जाता है ।

6. पूंजीवाद का विरोध

औद्योगिक क्रांति में इसके उद्भव के बाद से समाजवादी आदर्श पूंजीवाद द्वारा उत्पन्न सामाजिक विषमताओं की प्रतिक्रिया के रूप में पैदा हुआ है।

दोनों प्रणालियों के बीच कई अंतर हैं। समाजवाद में अर्थशास्त्र, उत्पादन और मजदूरी में राज्य का हस्तक्षेप है। पूंजीवाद में थोड़ा हस्तक्षेप होता है और आर्थिक बाजार की गति से कीमतों और मजदूरी को परिभाषित किया जाता है।

एक और अंतर सामाजिक वर्गों को चिंतित करता है। समाजवाद वर्गों के विभाजन के बिना एक समाज की तलाश करता है, पहले से ही पूंजीवाद में विभिन्न सामाजिक वर्ग हैं जो सामाजिक असमानताओं के अस्तित्व को प्रदर्शित करते हैं।

7. सामान्य ब्याज के लिए व्यक्तिगत ब्याज का अधीनता

यह समाजवादी आदर्श के कामकाज का हिस्सा है कि व्यक्तिगत इच्छाशक्ति की तुलना में सामूहिक या सामाजिक हित अधिक महत्वपूर्ण है।

इसका मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति के हितों को उन हितों के खिलाफ पृष्ठभूमि में रखा जाना चाहिए जो सभी के लिए सामान्य हैं।

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लोकतांत्रिक समाजवाद क्या है?

लोकतांत्रिक समाजवाद एक राजनीतिक विचारधारा हैं, जो राजनीतिक लोकतंत्र के साथ उत्पादन के साधनों के सामाजिक स्वामित्व की वक़ालत करती हैं, व इसका अधिकतर ज़ोर समाजवादी आर्थिक प्रणाली में लोकतांत्रिक प्रबन्धन पर रहता हैं। कभी कभी “लोकतांत्रिक समाजवाद” का प्रयोग “समाजवाद” के पर्यायवाची शब्द के रूप में होता हैं; “लोकतांत्रिक” विशेषण जोड़कर, इसके और मार्क्सवादी-लेनिनवादी प्रकार के समाजवाद के बीच अंतर किया जाता हैं, जिसे व्यापक रूप से व्यवहार में अलोकतांत्रिक देखा जाता हैं।

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समाजवाद एवं साम्यवाद में क्या अंतर है?

समाजवाद और साम्यवाद दोनों ही समाज में समानता के सिद्धांत पर आधारित हैं। दोनों ही एक ऐसे समाज की परिकल्पना करते हैं जहाँ व्यक्ति व्यक्ति में कोई भेद न हो। दोनों ही वाद का उद्द्येश्य हालाँकि समाज में समानता लाना है तो भी दोनों में कई अंतर है:

  • समाजवाद वर्गहीन समाज की कल्पना करता है जिसमे पूंजी और उत्पादन के साधनों पर समाज यानि राज्य का स्वामित्व होता है साथ ही वितरण भी समाज के नेतृत्व में रहता है वहीँ साम्यवादी व्यवस्था में पूंजी और उत्पादन के साधनों पर जनता का नियंत्रण होता है।
  • समाजवादी व्यवस्था में पारिश्रमिक योग्यता और काम के आधार पर दिया जाता है वहीँ साम्यवादी व्यवस्था में पारिश्रमिक व्यक्ति की आवश्यकतानुसार दिया जाता है।
  • समाजवाद में राज्य को महत्वपूर्ण और आवश्यक माना जाता है वहीँ साम्यवाद में राज्य की कोई परिकल्पना नहीं होती है।
  • समाजवाद में राज्य के सहयोग से समानता लाने की परिकल्पना की गयी है जबकि साम्यवाद का लक्ष्य ही राज्य को ख़त्म करना होता है। इनका मानना है कि राज्य शोषकों की शोषण में मदद पंहुचाता है।
  • समाजवाद शांतिपूर्वक समानता के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं वहीँ साम्यवाद में संघर्ष और क्रांति को समानता लाने का माध्यम माना जाता है।
  • समाजवाद आर्थिक प्रणाली है जबकि साम्यवाद आर्थिक और राजनितिक प्रणाली है।
  • समाजवाद में व्यक्तिगत सम्पति की अवधारणा स्वीकार्य है किन्तु साम्यवाद में व्यक्तिगत पूंजी अस्वीकार्य होती है।
  • समाजवाद के साथ साथ पूंजीवाद का अस्तित्व हो सकता है किन्तु साम्यवाद में पूंजीवाद एकदम असंभव है।
  • समाजवाद व्यक्तिगत समानता की ओर पहला कदम माना जा सकता है जबकि साम्यवाद व्यक्तिगत समानता की परिणीति है।

समाजवाद और साम्यवाद दोनों विचारों का संसार में काफी प्रभाव पड़ा और कई देशों ने इन मॉडलों को अपनाया। समाजवाद में राज्य की अवधारणा की वजह से यह काफी लोकप्रिय हुआ वहीँ साम्यवाद अपनी कट्टरता की वजह से धीरे धीरे सिमटता जा रहा है।

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समाजवाद क्या है? – FAQs

01. समाजवाद का जनक कौन था?

कार्ल हेनरिख मार्क्स वैज्ञानिक समाजवाद के जनक थे. इनके अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति के सिद्धांतों की समझ को ‘मार्क्सवाद’ कहा जाता है.

02. समाजवाद का उद्देश्य क्या है?

लाक्स एवं छूट के अनुसार- समाजवाद वह आन्दोलन है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने के उत्पादन में काम आने वाली प्रकृति निर्मित एवं मानव-निर्मित उत्पादन वस्तुओं का स्वामित्व एवं प्रबन्ध व्यक्तियों के स्थान पर समाज को सौंपना है। 

03. भारत में लोकतांत्रिक समाजवाद क्या है?

लोकतांत्रिक समाजवाद एक राजनीतिक विचारधारा हैं, जो राजनीतिक लोकतंत्र के साथ उत्पादन के साधनों के सामाजिक स्वामित्व की वक़ालत करती हैं, व इसका अधिकतर ज़ोर समाजवादी आर्थिक प्रणाली में लोकतांत्रिक प्रबन्धन पर रहता हैं।

04. समाजवादी विचार के संस्थापक कौन थे?

भारतवर्ष में आधुनिक काल के प्रथम प्रमुख समाजवादी महात्मा गांधी हैं, परंतु उनका समाजवाद एक विशेष प्रकार का है। गांधी जी के विचारों पर हिंदू, जैन, ईसाई आदि धर्म और रस्किन, टाल्सटाय और थोरो जैसे दार्शनिकों का प्रभाव स्पष्ट है।

05. समाजवाद शब्द का प्रथम प्रयोग कब हुआ?

1848

अंतिम शब्द

तो दोस्तों आज हमने समाजवाद (Socialism) के बारे में विस्तार से जाना है और मैं आशा करता हु की आप सभी को आज का यह आर्टिकल पसंद आया होगा और आप के लिए हेल्पफुल भी होगा.

यदि फिर भी आप के मन में समाजवाद क्या है? से सम्बंधित कोई भी प्रश्न या संदेह है तो निचे कमेंट कर के जरुर पूछे.

आर्टिकल को पूरा पढने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद.

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