संसाधन संरक्षण क्या है? | What Is Resources Conservation?

संसाधन संरक्षण क्या है? | What Is Resources Conservation?
संसाधन संरक्षण क्या है? | What Is Resources Conservation?

संसाधन संरक्षण क्या है? – नमस्कार दोस्तों कैसे है आप सभी? मैं आशा करता हु की आप सभी अच्छे ही होंगे. तो दोस्तों आज हम संसाधन संरक्षण (Resources Conservation) के बारे में विस्तार से जानेंगे.

आज के इस आर्टिकल में हम संसाधन क्या है, संसाधन संरक्षण क्या है (What Is Resources Conservation?), संसाधन संरक्षण की उपयोगिता क्या है, संसाधन संरक्षण का क्या अर्थ है, संसाधन संरक्षण की क्या आवश्यकता है, संसाधनों के संरक्षण का क्या महत्व है, संसाधन संरक्षण के उपाय, आदि के साथ संसाधन संरक्षण से सम्बंधित और भी बहुत सारी बातो के बारे में जानेंगे.

तो चलिए शुरू करते है…


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संसाधन क्या है? | Resources In Hindi

हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु संसाधन कहलाती है जिसका इस्तेमाल हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कर सकते हैं, जिसे बनाने के लिये हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है.

संसाधन मुख्यतः दो प्रकार के होते है:

  • जैव संसाधन (Bioresources)
  • अजैव संसाधन (Abiotic Resources)

जैव संसाधन (Bioresources) – वैसे संसाधन जैव संसाधन कहलाते हैं जो जैव मंडल से मिलते हैं। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।

अजैव संसाधन (Abiotic Resources) – वैसे संसाधन अजैव संसाधन कहलाते है जो निर्जीव पदार्थों से मिलते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।


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इनके अलावा भी कुछ अन्य तरह के संसाधन होते है जो निम्नलिखित है:

नवीकरण योग्य संसाधन – कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को नवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, जीव जंतु, आदि।

अनीवकरण योग्य संसाधन – कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम किसी भी तरीके से नवीकृत या पुन: उत्पन्न नहीं कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को अनीवकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: जीवाष्म ईंधन, धातु, आदि।

अंतर्राष्ट्रीय संसाधन – वैसे संसाधन अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहलाते हैं जिनका नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है। इसे समझने के लिये समुद्री क्षेत्र का उदाहरण लेते हैं। किसी भी देश की तट रेखा से 200 किमी तक के समुद्री क्षेत्र पर ही उस देश का नियंत्रण होता है। उसके आगे के समुद्री क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय संसाधन की श्रेणी मेआता है

संभावी संसाधन – किसी भी देश या क्षेत्र में कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जिनका उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा होता है। इन्हें संभावी संसाधन कहते हैं। उदाहरण: गुजरात और राजस्थान में उपलब्ध सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।


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संसाधन संरक्षण क्या है? | What Is Resource Conservation?

Resource Conservation (संसाधन संरक्षण) की परिभाषा को कई प्रकार से दिया जा सकता है जैसे की,

सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में संसाधनों की अहम भूमिका होती है। किंतु संसाधनों का अविवेकपूर्ण या अतिशय उपयोग विविध प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देते हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु विभिन्न स्तरों पर संरक्षण की आवश्यकता है। संसाधनों का योजनाबद्ध, समुचित और विवेकपूर्ण उपयोग ही उनका संरक्षण कहलाता है।
संसाधन का सतर्कतापूवक उपयोग करना और उन्हें नवीकरण के लिए समय देना, संसाधन संरक्षण कहलाता हैं| उदहारण के लिए वर्षा के पानी को इकठ्ठा कर इसका प्रयोग अन्य कामो में करके संसाधन संरक्षण किया जा सकता हैं|
संसाधन संरक्षण का अर्थ है संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना और उन्हें नए सिरे से बनाने का समय देना। यह करने की आवश्यकता है क्योंकि संसाधन सीमित और संपूर्ण हैं। संसाधनों को पृथ्वी पर असमान रूप से वितरित किया जाता है क्योंकि वितरण विभिन्न भौतिक कारकों जैसे कि इलाके, जलवायु और ऊंचाई पर निर्भर करता है।
संसाधन संरक्षण का अर्थ अपने आस–पास की वस्तुओं का अपनी जरूरतों के अनुसार कम–से–कम प्रयोग करना होता हैं. पृथ्वी पर उपलब्ध किसी भी वस्तु का प्रयोग अपनी आवश्यकता के अनुसार अधिक सावधानी से करना तथा वस्तुओं को दुबारा निर्मित होने लिए समय देना “ संसाधन संरक्षण ” कहलाता हैं. संसाधनों का संरक्षण कैसे करें.

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संसाधन संरक्षण का अर्थ क्या है?

संसाधन संरक्षण का अर्थ है संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना और उन्हें नए सिरे से बनाने का समय देना। यह करने की आवश्यकता है क्योंकि संसाधन सीमित और संपूर्ण हैं। संसाधनों को पृथ्वी पर असमान रूप से वितरित किया जाता है क्योंकि वितरण विभिन्न भौतिक कारकों जैसे कि इलाके, जलवायु और ऊंचाई पर निर्भर करता है।

संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना और उन्हें नवीनीकृत होने के लिए समय देना संसाधन संरक्षण कहा जाता है।

भावी पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता को बनाए रखते हुए वर्तमान पीढ़ी को अधिकतम लाभ प्रदान करने के लिए संसाधन संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का प्रबंधन है। संरक्षण में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और तर्कसंगत उपयोग दोनों शामिल हैं.


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संसाधन संरक्षण की क्या आवश्यकता है?

हमारे पास जो भी प्राकृतिक और भौतिक संसाधन है उसको संरक्षित तरीके से रखा जाना आवश्यक है जैसे प्राकृतिक संसाधन में हम जल का संरक्षण कर सकते हैं अगर हम जल के लिए यानी जो बारिश का जल होता है उसका हम संरक्षण करना चाहे तो हम आसानी से कर सकते हैं ठीक उसी तरह से बहुत से ऐसे संसाधन होते हैं उसका हम संरक्षण कर सकते हैं और संरक्षण करना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि यह जो संसाधन होते हैं वह असीमित तो है लेकिन कब खत्म हो जाएंगे इसकी कोई गणना नहीं की जा सकती है इसलिए संसाधन का संरक्षण जरूरी होता है.


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संसाधन संरक्षण की उपयोगिता क्या है?

प्राकृतिक संसाधन एक ऐसी चीज है जो प्रकृति से आती है और लोग प्राकृतिक संसाधन नहीं बना सकते हैं, लेकिन वे इसे एकत्र कर सकते हैं। प्राकृतिक संसाधन मानव जाति के लिए प्रकृति के वरदान हैं। लकड़ी, पत्थर, सीसा, धातु, वायु और कई अन्य संसाधनों को प्राकृतिक संसाधनों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। प्राकृतिक संसाधन सीधे पृथ्वी से प्राप्त होते हैं। मानव निर्मित वस्तुएँ इन संसाधनों का उपयोग अपने लाभ के लिए करती हैं।

संसाधन संरक्षण के उपाय

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाए क्योंकि वे खतरनाक दर से समाप्त हो रहे हैं। इसके अलावा इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है जो अप्रत्यक्ष रूप से जीवों को नुकसान पहुंचा रहा है।

आधुनिक जीवन शैली और प्रौद्योगिकी में प्रगति का प्राकृतिक संसाधनों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। कोयला और पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुत तेजी से समाप्त हो रहे हैं, और एक बार जब वे समाप्त हो जाएंगे, तो हमें ऊर्जा के अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना होगा।

इसलिए, हम मनुष्यों के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वे इस तरह से कार्य करें जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो।


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प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के तरीके नीचे सूचीबद्ध हैं

  • कम दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल चलाना.
  • प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैलों का प्रयोग करें.
  • प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की कोशिश करें और उन्हें धातु के कंटेनर या बायोडिग्रेडेबल वाले से बदलने की कोशिश करें.
  • रसोई के कचरे को खाद की जगह खाद के रूप में इस्तेमाल करना.
  • घर में ऑक्सीजन और हरियाली की आपूर्ति के लिए एक छोटा किचन गार्डन होना.
  • समान दूरी की यात्रा के लिए सार्वजनिक परिवहन, कार या बाइक पूलिंग का उपयोग करना.
  • भोजन की बर्बादी से बचें.
  • ईंधन वाले के बजाय इलेक्ट्रिक बाइक या कारों का उपयोग करने का प्रयास करें.
  • पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बने उत्पाद खरीदें.
  • धातु के डिब्बे, पुराने सेल फोन और प्लास्टिक की बोतलों जैसी सामग्रियों को रीसायकल करें.
  • घर में ऊर्जा की बचत करें (जब जरूरत न हो तो लाइट बंद कर दें).

इन उपर्युक्त तरीकों का पालन करने से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान हो सकता है। जनता में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। अब समय आ गया है कि हम अपने ग्रह पृथ्वी को बचाने के लिए कार्रवाई शुरू करें।


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Sudhanshu Gupta

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